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बचपन के दुश्मन - हेमा शर्मा

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दहशत में बचपन  पंचकूला की बच्ची हो या अलीगढ़ की ..., हाल ही में घटी दोनों ही घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि आखिर हम अपनी बेटियों को कैसा समाज देने जा रहे हैं ...???? दोनों में ही आरोपी उनके जानकार ही तो थे , जिन्होंने उनके बचपन को खिलने से पहले ही रौंद डाला ... । हमारी जेनेरेशन में इतना डर नहीं है ..., परंतु धीरे धीरे हम अपने बच्चों के मन में डर और अविश्वास जरूर भर देंगे। सवाल और भी हैं ..., परंतु जवाब नदारद हैं ... हेमा शर्मा बचपन के दुश्मन खुद ही उठाने होंगे कुछ कदम कैद होने लगा है घरों में बचपन कहां जा रहा है समाज? पंचकूला में एक नन्ही बच्ची अपने घर के बाहर अपने साथियों और भाई बहनों के साथ खेल रही होती है और चंद ही घंटे बाद उसकी लाश ही परिजनों को मिलती है, क्योंकि उस बच्ची का कसूर बस इतना था कि उसने किसी अपने पर ही विश्वास किया था और उसके साथ चली आई थी, जिसने उस मासूम का रेप किया और बाद में बड़ी ही निर्ममता के साथ पत्थर पर पटक कर उसे मार डाला। अलीगढ़ के ...
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काम वाली बाई के नखरों से ऐसे पाएं निजात आजकल के व्यस्त जीवन में जहां लोगों की प्रोफेशनल लाईफ बहुत बिजी होती जा रही है तथा उनका ज्यादा समय घर से बाहर ही बीतता है , ऐसे में कामकाजी महिलाएं अपने घर के रूटीन में किए जाने वाले कामों के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं। ऐसे में घर के रोजाना के अन्य कामों को करने के लिए काम वाली बाई को रखना एक जरूरत भी बनती जा रही है , परंतु काम वाली बाई के नखरे भी दिनों - दिन बढ़ते जा रहे हैं , परंतु कुछ कारगर टिप्स अपना कर आप काम वाली बाई के नखरों से निजात पा सकती हैं। - जब आपने काम वाली बाई रख ही ली है , तो उसके साथ कभी भी दुर्व्यवहार   न करें एवं उन्हें उचित सम्मान दें। इससे उनके दिल में आपके लिए भी सम्मान और आदर बना रहेगा और वह अच्छे से मन लगा कर सारे काम करेगी। अब समय बदलता जा रहा है , अत : आप भी अपनी बाई से पुरानी स्टाइल में जमीन पर झुक कर पोंछा लगाने को न कहें , बल्कि उसके ल...