बचपन के दुश्मन - हेमा शर्मा
दहशत में बचपन पंचकूला की बच्ची हो या अलीगढ़ की ..., हाल ही में घटी दोनों ही घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि आखिर हम अपनी बेटियों को कैसा समाज देने जा रहे हैं ...???? दोनों में ही आरोपी उनके जानकार ही तो थे , जिन्होंने उनके बचपन को खिलने से पहले ही रौंद डाला ... । हमारी जेनेरेशन में इतना डर नहीं है ..., परंतु धीरे धीरे हम अपने बच्चों के मन में डर और अविश्वास जरूर भर देंगे। सवाल और भी हैं ..., परंतु जवाब नदारद हैं ... हेमा शर्मा बचपन के दुश्मन खुद ही उठाने होंगे कुछ कदम कैद होने लगा है घरों में बचपन कहां जा रहा है समाज? पंचकूला में एक नन्ही बच्ची अपने घर के बाहर अपने साथियों और भाई बहनों के साथ खेल रही होती है और चंद ही घंटे बाद उसकी लाश ही परिजनों को मिलती है, क्योंकि उस बच्ची का कसूर बस इतना था कि उसने किसी अपने पर ही विश्वास किया था और उसके साथ चली आई थी, जिसने उस मासूम का रेप किया और बाद में बड़ी ही निर्ममता के साथ पत्थर पर पटक कर उसे मार डाला। अलीगढ़ के ...