दोस्ती के रूप अनेक पूजा की थाली में रखे दीपक की लौ सा बड़ा पावन रिश्ता होता है दोस्ती , अल्हड़ नदी सा मनचला , इन्द्रधनुषी रंगो सा सजीला , खुले आसमान में पक्षियों के मधुर कलरव चहकता , फूलों की महक सा महकता रिश्ता होता है दोस्ती अर्थात अपने भीतर कितने ही रूप समेटे रहता है यह। दोस्त के रूठने पर रोता है यह तो दोस्त के मिलने पर खिलखिलाता है यह रिश्ता। दोस्ती जगह और समय के साथ अपने रंग भी बदलती है , कहीं यह दिन के कुछ पलों का साथ है , तो कहीं उम्रभर का बंधन है , फिर भी सुख - दुख बांटती सी , कठिनाइयों के हल सुझाती सह यह आगे ही बढ़ती जाती है। व्यावसायिक दोस्ती आपसी सामंजस्य और अटूट भरोसे के बल पर रची हुई दोस्ती का यह भी एक रूप है। मिल - जुल कर एक ही व्यवसाय करने वाले दो दोस्त सगे - संबंधी जैसे बन जाते हैं , फिर भी दोस्त से ज्यादा पार्टनर के नाम से जाने जाते हैं। लंच टाईम की दोस्ती ढेर सारी...