दोस्ती के रूप अनेक

पूजा की थाली में रखे दीपक की लौ सा बड़ा पावन रिश्ता होता है दोस्ती, अल्हड़ नदी सा मनचला, इन्द्रधनुषी रंगो सा सजीला, खुले आसमान में पक्षियों के मधुर कलरव चहकता, फूलों की महक सा महकता रिश्ता होता है दोस्ती अर्थात अपने भीतर कितने ही रूप समेटे रहता है यह। दोस्त के रूठने पर रोता है यह तो दोस्त के मिलने पर खिलखिलाता है यह रिश्ता।
दोस्ती जगह और समय के साथ अपने रंग भी बदलती है, कहीं यह दिन के कुछ पलों का साथ है, तो कहीं उम्रभर का बंधन है, फिर भी सुख-दुख बांटती सी, कठिनाइयों के हल सुझाती सह यह आगे ही बढ़ती जाती है।
व्यावसायिक दोस्ती
आपसी सामंजस्य और अटूट भरोसे के बल पर रची हुई दोस्ती का यह भी एक रूप है। मिल-जुल कर एक ही व्यवसाय करने वाले दो दोस्त सगे-संबंधी जैसे बन जाते हैं, फिर भी दोस्त से ज्यादा पार्टनर के नाम से जाने जाते हैं।
लंच टाईम की दोस्ती
ढेर सारी फाइलों और टारगेट के दबाव, बॉस की झाड़, घर में सास-बहू के शिकवे-शिकायतें तथा बिटिया के लिए सुयोग्य वर की ङ्क्षचता पर मलहम लगाती है, कार्यालय के लंच टाईम वाली दोस्ती, जिसमें टिफन के साथ सुख-दुख भी शेयर किए जाते हैं। कोई बिटिया के लिए अपने जानकारों में लायक लडक़ा सुझा कर ङ्क्षचता को कम कर देता है, तो कोई अपने जानकार से फोन का कनैक्शन दिला देता है।
इस रिश्ते का विकल्प नहीं
भले ही बच्चों की कंचों में गुंथी दोस्ती हो या फेसबुक पर फोटो लाईक और शेयर करती दोस्ती हो, एग्जाम के नोटस शेयर करने से लेकर दोस्त के पास होने की खुशी को अपने से बढ़ कर सेलीब्रेट करती दोस्ती का कोई विकल्प हो ही नहीं सकता, क्योंकि ये रिश्ता शब्दों में सीमित नहीं, बल्कि भावनाओं सा विशाल है।
एक सी हॉबी वाली दोस्ती 
जब दो लोगों की पसंद एक सी हो तो दोस्ती भी तुरंत हो जाती है, यदि सामने वाले को भी आपकी तरह रणवीर कपूर पसंद है तो हो गई दोस्ती, एक ही डिजाइनर, एक ही राइटर, एक ही ङ्क्षसगर या फिर पर्यटन में एक ही जगह की पसंद जब किसी अनजान में भी मिल जाती है, तो उससे सहज ही दोस्त का रिश्ता बन जाता है। इसे कहते हैं हॉबी वाली दोस्ती।
सोशल साइट्स वाली दोस्ती
जहां बिछुड़े दोस्त मिलते हैं या कुछ नए बनते हैं। जहां दादू और पापा भी फ्रेंड लिस्ट में हैं, वहीं दीदी की छोटी सी बिटिया भी आपकी फ्रेंड है। यहां तक कि टीचर और बॉस भी आपकी फ्रेंड लिस्ट में हैं और आपकी वॉल पर जहां उनके संदेश आते हैं, वहीं आपके संदेशों पर उनके कमेंटस भी आते हैं।
                                                   स्कूल-कॉलेज वाली दोस्ती
दोस्त की देखा-देखी किताब में फूल या विद्या पढ़ाई की पत्तियांट रख लेना, दोस्तों से टी शर्ट शेयर करना, तेरी बाईक मेरी बाईक का सिद्धांत अपनाना, कैंटीन में चाय समोसे की पार्टी करना और दोस्त को मस्का मार कर उसका होम वर्क कॉपी कर लेना से ले कर पेपर आने पर रात देर तक साथ पढऩा जैसे कितने ही पलों को समेटती है यह स्कूल-कॉलेज वाली दोस्ती, तभी तो यादों के पन्नों में हमेशा रहती है यह शरारती सी दोस्ती।
पास-पड़ोस की दोस्ती
धूप में कपड़े सुखाते हुए बातें करने की दोस्ती, कभी एक कटोरी चीनी की चाहत वाली दोस्ती, कभी धारावाहिकों पर घंटों बतियाती दोस्ती तो कभी स्कूटर और कार को धोते हुए सिस्टम की टांग खींचती दोस्ती केवल पास-पड़ोस में ही मिल सकती है, जिस पर आपका खास दोस्त भी आपत्ति नहीं जता सकता, क्योंकि कुछ पलों का साथ होती है यह दोस्ती, फिर समब अपने में ही व्यस्त हो जाते हैं।
सैर वाली दोस्ती
सुबह की ताजी हवा में टहलने या व्यायाम करने आए पार्क में अक्सर दोस्तों की टोलियां बन जाती हैं, जो सैर करते हुए ही बीते दिन की जाने कितनी ही बातें शेयर कर जाते हैं। देश-विदेश की यात्रा पर निकले लोगों के जत्थे में भी अक्सर दोस्ती हो जाती है देखा जाए तो इस प्रकार की सैर वाली दोस्ती का भी अपना ही लुत्फ  होता है।
हेमा शर्मा, चंडीगढ़


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