तुम्ही में है मां दुर्गा ... ... नारी केवल श्रृंगार करना ही नहीं जानती , बल्कि समय आने पर शस्त्र उठाना भी जानती है , वह केवल मां बन वात्सल्य लुटाना ही नहीं जानती , बल्कि क्रोध आने पर महिषासुर को मारना भी जानती है। उसकी वाणी में प्रेम के तराने ही नहीं है , बल्कि अन्याय के खिलाफ उठती उसकी गर्जना भी है अर्थात मां दुर्गा के नौ रूपों को नारी खुद में संजाए होने के बावजूद भी अनजान है कि मां दुर्गा मूर्तियों में ही नहीं खुद उस में भी विराजमान है और अब वक्त आ गया है कि वह स्वयं में उन शक्तियों को जागृत करे , ताकि जहां दूसरों को प्रेम और संयम सिखा सके , वहीं अन्याय करने वालों के खिलाफ आवाज भी उठा सके। मां दुर्गा का हर रूप प्रेरणादायी तथा जीवन में ऊर्जा का संचार करने वाला है , यदि आप भी अब तक उन रूपों को स्वयं में आत्मसात् नहीं कर पाई हैं , तो इस दुर्गा अष्टमी पर उसे पहचान...