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       अभी उड़ान बाकी है... नारी या तो देवी है या दासी, नारी या तो करुणा की मूरत है या फिर क्रूरता की मिसाल, कहीं उसे ताडऩ की अधिकारी माना गया तो कहीं उसके आंचल में दूध और आंखों में पानी की बात की गई है, अपने लिए तय हर मिसाल को नारी ने अपनी नियति मान कर स्वीकार कर लिया, परंतु वह भी सामान्य एक इंसान है, यह दर्जा उसे आज तक नहीं मिला और खुद के लिए यही स्थान पाने की उसकी लालसा मानों उसका संघर्ष बन गई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के आयोजनों पर अपने हक और अधिकार की वह आवाज उठाने लगी। यह सत्य है कि घर-परिवार हो या समाज या देश या विश्व, किसी भी क्षेत्र में शोषण जब अपने चरम पर पहुंचता है, तभी प्रतिरोध के स्वर जन्म लेना आरंभ करते हैं । भले ही नारी ने आज धरा से लेकर क्षितिज तक में अपने नाम का परचम लहराया है और सफलता के विभिन्न सोपानों को छुआ है, परंतु इसे आधी आबादी की पूर्ण रूप सफलता नहीं माना जा सकता, अभी भी उसकी उड़ान बाकी है, जिसे अपनी कोशिशों से उसे निरंतर दूर करते जाना है। समस्याएं कम नहीं महिलाओं से संबंधित समस्याएं कम नहीं हैं, हर वर्ग, हर उम्र, हर जाति और...