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Showing posts from June, 2018
जिंदगी ना हो धुआं धुआं - हेमा शर्मा
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जिंदगी ना हो धुआं धुआं आधुनिकता एवं नारी सशक्तिकरण के नाम पर आज महानगरों की युवतियों ने अपने लाईफ स्टाइल को पूरी तरह से बदल लिया है। कॉल सैंटर, मीडिया, मॉडलिंग एवं बड़ी कंपनियों में ऊंचे पदों पर काम करती युवतियां सरेआम धूम्रपान करती देखी जा सकती हैं, यहां तक कि लेट नाईट पार्टीज में भी युवतियों द्वारा धुएं के छल्ले उड़ाना एक आम बात हो गई है। पहली बार देखने वालों के लिए भले ही यह हैरत की बात हो, परंतु रोज देखने वालों के लिए भी यह कोई नई बात नहीं है। वास्तव में युवतियों ने इसे स्टेटस सिंबल के रूप में अपना लिया है। हालांकि गांवों और कबीलों में रहने वाली महिलाओं को तो धूम्रपान करने या तंबाखू खाने की आदत है, यह सब लोग जानते हैं, क्योंकि पुरुषों के समान अत्याधिक शारीरिक मेहनत करने के कारण इन सबका सेवन करना उनकी एक तरह से मजबूरी हो सकती है, ताकि वे अपनी थकान और भूख को दबा कर फिर से काम पर लग सकें, परंतु आज की आधुनिक युवतियों के लिए तो नशा करना एक स्टेट्स सिंबल बन चुका है। आंकड़ों की मानें तो पूरे विश्व में तंबाखू के सेवन से प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख लोग मौत के शिकार होते है,...
हाई हील्स से होने लगता है जोड़ों में दर्द - हेमा शर्मा
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हाई हील्स से होने लगता है जोड़ों में दर्द स्टाइलिश और फैशनेबल दिखना हर युवती की चाहत होती है, लेकिन इन सब में अपनी हैल्थ को नजर अंदाज करना समझदारी की बात नहीं कही जा सकती। ऐसे में वही फैशन रूल्स अपनाएं, जिनमें अपनी हैल्थ से समझौता ना करना पड़े। आपका थोड़ा सा अलर्ट होना ही आपको फैशनेबल के साथ-साथ हैल्दी भी रखेगा। हाई हील्स छरहरा और बोल्ड लुक पाने की होड़ में युवतियां भले ही हाई हील्स के सैंडल्स एवं शूज प्रैफर करें, परंतु इसका सेहत पर कुछ ऐसा असर देखने को मिलता है कि कुछ समय के पश्चात उन्हें घुटने, कमर और शरीर के अन्य जोड़ों में दर्द की शिकायत होने लगती है। एक अनुमान के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत् महिलाएं हाई हील के शूज पहनती हैं, जो कि पैरों की सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है। देखा जाए तो मात्र 10 प्रतिशत महिलाएं ही सेहत की दृष्टि से सुरक्षित जूते एवं चप्पल पहनती हैं। एक्सपर्टस के अनुसार हाई हील्स पहनने वाली 90 प्रतिशत लड़कियां घुटने, कमर, कूल्हे, कंधे और जोड़ों के दर्द से परेशान रहती हैं। ...
हैलमेट : जान का बचाव - हेमा शर्मा
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हैलमेट : जान का बचाव ना तो दुर्घटना और ना ही मौत जाति, स्त्री और पुरुष का भेदभाव करती है, अत: सडक़ दुर्घटना से बचाव जहां गति नियंत्रण है, वहीं दोपहिया चालकों को हैलमेट जरूर पहनना चाहिए। जान हर किसी की जरूरी है, अपने घर के लिए..., अपने समाज के लिए... और अपने देश के लिए...। मात्र इसलिए हैलमेट ना पहनना कि आप नारी हैं या किसी खास धर्म से ताल्लुक रखती हैं, आपका किसी और के साथ नहीं बल्कि आपके अपने प्रति ही अन्याय होगा। इसके लिए बहुत सी ऐसी युवतियां और महिलाएं आपको अपने आसपास एक उदाहरण के रूप में नज़र आ जाएंगी, जिन्होंने इस बात का इंतज़ार कभी नहीं किया कि ऐसा कोई कानून बने, जिसमें महिलाओं के लिए हैलमेट पहना जाना अनिवार्य हो और वे तभी हैलमेट पहनें, बल्कि उन्होंने अपनी जान की कीमत को समझा और दोपहिया वाहन पहनते समय हैलमेट पहनना आरंभ कर दिया। यदि आंकड़ों की बात करें तो चंडीगढ़ में पिछले तीन साल में रोड एक्सीडैंट में 24 महिलाएं जान गंवा चुकी हैं तथा 84 महिलाएं घायल हुई हैं। खुद सुरक्षित तभी रखेंगी दूसरों का ख्याल हैलमेट का वास्तविक अर्थ ही है सुरक्षा और यदि हैलमेट पहनने से दुघर्टना में आ...