जिंदगी ना हो धुआं धुआं - हेमा शर्मा


जिंदगी ना हो धुआं धुआं

आधुनिकता एवं नारी सशक्तिकरण के नाम पर आज महानगरों की युवतियों ने अपने लाईफ स्टाइल को पूरी तरह से बदल लिया है। कॉल सैंटर, मीडिया, मॉडलिंग एवं बड़ी कंपनियों में ऊंचे पदों  पर काम करती युवतियां सरेआम धूम्रपान करती देखी जा सकती हैं, यहां तक कि लेट नाईट पार्टीज में भी युवतियों द्वारा धुएं के छल्ले उड़ाना एक आम बात हो गई है। पहली बार देखने वालों के लिए भले ही यह हैरत की बात हो, परंतु रोज देखने वालों के लिए भी यह कोई नई बात नहीं है। वास्तव में युवतियों ने इसे स्टेटस सिंबल के रूप में अपना लिया है।
हालांकि गांवों और कबीलों में रहने वाली महिलाओं को तो धूम्रपान करने या तंबाखू खाने की आदत है, यह सब लोग जानते हैं, क्योंकि पुरुषों के समान अत्याधिक शारीरिक मेहनत करने के कारण इन सबका सेवन करना उनकी एक तरह से मजबूरी हो सकती है, ताकि वे अपनी थकान और भूख को दबा कर फिर से काम पर लग सकें, परंतु आज की आधुनिक युवतियों के लिए तो नशा करना एक स्टेट्स सिंबल बन चुका है। आंकड़ों की मानें तो पूरे विश्व में तंबाखू के सेवन से प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख लोग मौत के शिकार होते है, जिसमें से 8 से 9 लाख भारतीय होते हैं तथा भारत में तंबाखू का सेवन करने वाली महिलाओं की संख्या ही 70 प्रतिशत है तथा आंकड़ों में भी निरंतर वृद्धि ही हो रही है, जो कि चिंता का विषय है।

नशे के नुक्सान जानती हैं

मुश्किल तो यह है कि धूम्रपान की लत का शिकार होती जा रही ये युवतियां शिक्षित हैं और नशे के नुक्सान से भी भली-भांति परिचित हैं, परंतु फिर भी वे इसे छोड़ नहीं पाती हैं। करियर के क्षेत्र में पुरुषों से प्रतिस्पर्धा की दौड़ में स्वयं को साबित करने की जिद, ऑफिस में काम का दबाव और घर में गृहस्थी की जिम्मेदारी में निरंतर आज की नारी सिगरेट के एक कश में पल भर का सुकून महसूस करती है। कभी फैशन के कारण या फिर कभी एक-दूसरे की देखा-देखी शुरू किया धूम्रपान का एक कश कब उनकी आदत में बदल जाता है, यह उन्हें भी पता नहीं चलता। वह एक कश कब तलब में बदल जाता है और ये तलब ही उन्हें कब मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बनाने लगती है, उन्हें महसूस ही नहीं हो पाता।

अकेलापन बनता कारण

आज जिस प्रकार से अधिकांश युवतियां सिंगल और घर से दूर रही हैं, उन पर अकेलापन कुछ ज्यादा ही हावी हो जाता है। अपने उस अकेलेपन से छुटकारा पाने के लिए ही अनेक युवतियां धूम्रपान की लत को अपनी लाईफ स्टाइल का हिस्सा बना लेती हैं और अकेलेपन के डिप्रेशन से छुटकारा पाने का प्रयास करती हैं।

दोस्तों के संग पार्टीज

ऐसी युवतियां जो कि अपने दोस्तों के साथ हर रोज लेट नाईट पार्टीज में जाती हैं, वे भी नाईट लाईफ के कल्चर से नहीं बच पाती हैं, क्योंकि इन पार्टीज में जो युवती धुएं के छल्ले नहीं उड़ा सकती, वो आधुनिकता की दौड़ में भी शामिल नहीं हो सकती।

वर्क प्रेशर

कॉल सेंटर, मीडिया एवं मॉडलिंग में काम करने वाली युवतियों पर भी वर्क प्रेशर अन्य फील्ड की युवतियों के मुकाबले कुछ ज्यादा ही होता है, यही नहीं उन्हें देर रात तक घर से बाहर रह कर काम करना होता है। अपने वर्क प्रेशर से उपजे तनाव से राहत पाने के लिए ही वे लोग धूम्रपान का सहारा ले लेती हैं।

मुश्किल है आदत छोडऩा

देखा जाए तो धूम्रपान या अन्य किसी भी तरह से तंबाखू सेवन करने वाले 71 प्रतिशत लोगों में से केवल 2 या 3 प्रतिशत लोग ही इस बुरी आदत से छुटकारा पाने में सफल हो पाते हैं, यूं भी पुरुषों की तुलना में स्त्रियों के लिए इस बुरी आदत से छुटकारा पाना काफी मुश्किल हो जाता है।

धूम्रपान के परिणाम

गर्भवती स्त्रियों के द्वारा तंबाखू या सिगरेट का सेवन करने से इसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर भी पडऩा स्वाभाविक है। इसके कारण गर्भपात, अविकसित संतान का जन्म, मानसिक या शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे का जन्म आदि केस देखने को मिलते हैं। एक शोध के अनुसार एक सिगरेट में फिनॉल, लिड, टार और केडियम जैसे 4,800 जितने खतरनाक केमिकल होते हैं और उसके धुएं में 4,000 जितने केमिकल और लगभग 500 जितनी जहरीली गैस होती है। यही कारण है कि सिगरेट पीने वाले से कहीं अधिक सामने खड़े व्यक्ति को नुकसान पहुंचाती है।
                                                                                                                                     हेमा शर्मा

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