परिवार का जादूगर संयम और सहनशीलता से भरपूर नारी अपने परिवार में मां, बहन, बेटी, और पत्नी बहु के रूप में वह अपनी ममता और प्यार का सागर लुटाती है, परिवार में बच्चों से लेकर बड़ों तक की हर डिमांड को हंसते-हंसते वह पूरा करती है और बीमारी में हर किसी की सेवा करती है। सुबह सब से पहले उठने वाली और रात को सबसे बाद में सोने वाली नारी अपना वजूद कहीं भूल ही जाती है और बदले में वह किसी से कुछ नहीं चाहती। नारी में इतने रूप और भाव समाए हैं कि उसे देखते हुए यही प्रतीत होता है दिल में प्रेम, आंखों में स्नेह और कई हाथों से झटपट हर काम समेटती हुई वह कोई आम इंसान है ही नहीं, बल्कि कोई देवी या फिर कोई जादूगर है। गृहणी होना कोई आसान नहीं अमूमन एक कामकाजी महिला के मुकाबले में घर का कामकाज देखने वाली गृहणी के बारे में हर किसी की यही सोच होती है कि उसके पास न तो ज्यादा काम ही होता है और न ही वह घर की चार दीवारी से बाहर जाकर कोई जिम्मेवारी वाला काम कर सकती है, उसके लिए ङ्क्षजदगी बेहद आरामभरी है। यही नहीं परिवार में यदि दो बहुओं में से एक बहु कमाऊ हो तो उसकी इज्जत ...
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Showing posts from March, 2015
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बेखबर न रहें औरत समझ कर अभी कुछ माह पहले की ही बात है कि चंडीगढ़ में एक ज्यूलरी शॉप पर नोज पिन देखने आई महिला एक घंटे के बाद यह कह कर चली गई कि जैसा नोज पिन उसे चाहिए, वैसा उनके पास नहीं है। उसके जाने के बाद सेल्स गर्ल ने देखा कि बॉक्स में एक डासमंड नोज पिन नहीं है, जिसकी कीमत लगभग एक लाख रुपये थी। सीसी टीवी कैमरे में देखने पर पता चला कि वह सभ्रांत सी दिखने वाली महिला अपने मुंह में उस नोज पिन को छिपा कर ले गई है। इसी प्रकार कभी कहीं महिलाओं द्वारा कंगन चुराने, तो कहीं अपने बैग में चुपके से कपड़े चुरा कर ले जाने की खबरें भी अक्सर सुनने को मिलती रहती हैं। अमूमन इस प्रकार की महिलाएं दो से चार के ग्रुप में या फिर अपने पुरुष साथी के साथ इस तरह की वारदातों को अंजाम देती हैं, बहुत कम ऐसा होता है कि अकेली महिला या युवती इस प्रकार के काम को अंजाम दे। इसके लिए वक्त भी ऐसा चुना जाता है कि उस समय या तो दुकान पर बहुत भीड़ हो या फिर बिल्कुल भी रश न हो, दो...
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हर नारी में है दुर्गा संयम और सहनशीलता से भरपूर है नारी..., ममता का सागर लुटाती है नारी, करके तो देखे कोई मर्यादा की सीमा पार... तो चंडी रूप भी धर कर लेती है नारी। परिवार में बच्चों से लेकर बड़ों तक की हर डिमांड को हंसते-हंसते पूरा करना और बीमारी में हर किसी की सेवा करना। परिवार की सुरक्षा एवं भलाई के लिए हमेशा तत्पर रहना, यहां तक कि अपनी जान तक की भी परवाह न करना। सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज बुलंद करना और न्याय के लिए लड़ जाना..., खुद पर आ जाए तो जमीं पर ही नहीं चांद पर भी कदम रख जाना, बात देश की हो तो हंसते हुए जान दे जाना... यह किसी विशेष महिला में नहीं बल्कि हर नारी में मां दुर्गा के ममता और शक्ति के गुण इस कद्र विद्यमान हैं कि समय-समय पर वह अलग रूपों में नजर आती है और कई बार तो उसके कारनामों को देख कर हैरानी हो जाती है। मां दुर्गा की तरह वह काफी साहसी है और अपनी लड़ाई अकेले लडऩा जानती है। नारी में भी हैं नौ रूप, जो कि समय-समय पर उसमें नजर आते हैं, जिन्हें अगर आप पहले नहीं समझ पाए तो इसे पढऩे के बाद तो जरूर समझ जाएंगे। प्...
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आवाज तो उठा कभी 14 साल की मासूम बच्ची तो कभी 80 साल की प्रौढ़ा पारीवारिक से लेकर सामाजिक तक की शिकार होती है, तो हमें इसकी खबर तभी लगती है, जब मीडिया में इसका चर्चा होता है, नहीं तो हम अपने परिवार और पड़ोस तक में घटने वाली ऐसी घटनाओं को बेहद सहजता से लेते हुए उसे नजर अंदाज कर देते हैं। यदि इस पर चर्चा की जाए तो रोकने का एक ही हल मिलेगा कि महिलाओं को इसके खिलाफ स्वयं ही खुल कर आवाज अठानी होगी, पर वास्तव में देखा जाए तो कितनी महिलाएं अपने खिलाफ होने वाली ङ्क्षहसा के बारे में खुल कर बात कर पाती हैं। कानून हैं बहुत महिलाओं पर हिंसा रोकने के लिए आज अनेक प्रकार के कानून मौजूद हैं। घरेलू हिंसा की रोकथाम, दहेज निषेध संबंधी नए कानून के अलावा कार्यस्थलों पर उत्पीड़न रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अनेक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, फिर भी उन पर होने वाली हिंसा का सिलसिला कहीं नहीं थमा। इसका सीधा सा कारण जहां कानूनों में कई तरह की खामियां हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें सही तरी...
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बदलाव का फैसला तो स्वयं ही लेना होगा फिल्म लगे रहो मुन्ना भाई का वह दृश्य तो आपको याद होगा कि एक आदमी द्वारा दूसरे के घर के आगे पान थूक कर जाने पर घर के मालिक द्वारा उस जगह को स्वयं साफ कर देना , एक दिन उस थूक कर जाने वाले आदमी को अपनी आदत सुधारने पर विवश कर देता है। यह बात भले ही गांधीगिरी की है , परंतु इसमें कहीं ना कहीं बदलाव की भावना भी काम कर रही होती है , क्योंकि अक्सर हम दूसरों के व्यवहार या समाज की संवेदनहीनता को लेकर यही सोचते हैं कि आखिर बदलाव कब आएगा। दुनिया को देखने का हर किसी का अपना ही नजरिया होता है , इस लिए कुछ चीजें यदि एक के लिए सही और फायदेमंद है तो दूसरे के लिए बुरी और नुकसानदेह भी हो सकती हैं , इसलिए बदलाव का फैसला तो हर किसी को अपना ही लेना होगा , इसलिए दूसरों को बदलने का प्रयास छोड़ कर सिर्फ स्वयं में ही बदलाव लाएं तो दूसरे भी...