हम-तुम एक-दूजे के ... ...


शादी एक ऐसा बंधन है जहां दो स्वतंत्र हृदय एक साथ धडक़ते हैं, जहां दो दिल अपने संबंध को जन्म-जन्मांतर तक निभाने की कस्में खाते हैं, जिसमें एक-दूजे के लिए प्यार और विश्वास होता है और यही दांपत्य के रिश्ते को सही मायने में स्थायित्व प्रदान करता है। विवाह के बाद पति-पत्नी दोनों एक दूसरे से अपने मन की बातें शेयर करना चाहते हैं और उम्मीद रखते हैं कि दूसरा भी उनके साथ हर बात सांझी करे, परंतु वास्तव में ऐसा संभव नहीं हो पाता, क्योंकि हर कोई निजी स्वतंत्रता भी तो चाहता है। शादी के बाद जब यह स्वतंत्रता कहीं खोने लगती है और तनाव आने लगता है।

यह भी सच है कि भावनाओं में कैद स्त्री की स्वतंत्रता ही शादी के बाद कहीं ज्यादा खो जाती है, क्योंकि पुरुष के लिए तो स्वतंत्रता के कुछ दरवाजे हमेशा से ही खुले रखे गए हैं। आधुनिक समय में जब शिक्षा और अधिकारों का स्तर एक समान है, उस समय केवल किसी एक के ही विचारों की महत्ता रिश्ते में असहजता पैदा कर सकती है और यह नाकारात्मक प्रवृत्ति किसी भी मजबूत रिश्ते के लिए हानिकारक हो सकती है। ऐसी स्थिति ना आए इसके लिए जरूरी है कि अपने संबंध को आधार प्रदान करने हेतु एक-दूसरे को समझें और भावनाओं की कद्र करें। अपनी निजी स्वतंत्रता के साथ उनकी निजी स्वतंत्रता को भी महत्व दें, ताकि खुशियां भी आपसे दोस्ती कर बैठें। 

शब्द एवं मूड

आपस में बातचीत करते रहना स्वस्थ संबंध की कुंजी मानी गई है, अत: मजाक में भी ऐसे शब्द अपनी बातों में यूज ना करें, जो आपके साथी को नाराज या दुखी कर जाएं। किसी अहम मुद्दे या निजी मुद्दे पर बात करते समय उनके मूड का भी पूरा ध्यान रखें।

भावनाओं की कद्र

यदि आप अपने साथी की भावनाओं और विचारों की कद्र नहीं करेंगे, तो वे स्वयं को तो जकड़ा हुआ महसूस करेंगे ही साथ ही आपको भी महसूस कराएंगे।

स्वतंत्र लाईफ स्टाइल

यह सबसे जरूरी है कि दो लोग साथ रहते हुए भी अपनी निजी पहचान को बरकरार रखें, अत: अपने साथ-साथ साथी के शौक, पसंद, विचार, उम्मीदें एवं इच्छाओं को भी महत्व दें, उन्हें भी सुनें। उनका पर्सनल सामान उनका ही रहने दें। बार-बार उनका मोबाइल चैक करना, चोरी-छिपे उन्हें सुनना, उनके हर काम में अडंग़ा लगाना, दोस्तों के साथ रहने पर शक करना ये सब आपके नाकारात्मक व्यक्तित्व को दर्शाते हैं, जबकि आप स्वयं के लिए इस तरह से उनका नजर रखना बिल्कुल भी पसंद नहीं करेंगे। इस प्रकार का व्यवहार केवल क्रोध, घुटन और घृणा को ही बढ़ावा देता है।

संतुष्ट रहें 

कोई भी आदमी तभी सुखी रह सकता है, यदि वह जो भी उसे जीवन में मिला है, उसे पूरे मन और आनंद से स्वीकार करे। यदि आप संतुष्ट होना सीखेंगे तो जीवन में कभी उनसे शिकायत का मौका भी नहीं मिलेगा।

रिश्तों की मजबूती रहेगी बरकरार 

- अपने साथी के समय को अपना निजी अधिकार ना मान कर उसे उसके हिसाब से उन पलों को जीने दें।

- अपने मन की भावनाओं को व्यक्त करना तथा दूसरे की भावनाओं को समझना सीखें।

- अपना एक निजी व्यक्तित्व कायम रखें तथा पूरा जीवन दूसरों के अनुसार ही ना जिएं।

                                                                              हेमा शर्मा

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