कई तरह की तैयारियां कर होली के त्यौहार को यादगार बनाने की योजनाएं आप के मन में बनने लगती हैं, तो बचपन की होली की यादें भी मन में ताजा हो उठती हैं।कभी-कभी तो समझ में ही नहीं आता कि ऐसा क्या नया करें कि रंग और गुलाल की महक बरसों तक सबके मन में याद रहे।
यहां हम आप को बता रहे
हैं कि आप होली को यादगार कैसे बना सकती हैं।
खो गए फाग के राग
कभी फाल्गुन का महीना शुरू होते ही
फिजां में होली के रंगीले और सुरीले गीत तैरने लगते थे, जिन्हें फाग या फगुआ गीत कहा
जाता है। पूरा महीना गांवों में महफिलें जमती थीं, शहरों में भी ढोल-मंजीरे के साथ
फगुआ के गीत गाए जाते थे, परंतु समय की कमी, बदलती जीवन शैली और कई अन्य वजहों से शहरों
और गांवों में भी यह परंपरा दम तोड़ रही है।
आप होली के दिन इस परंपरा को फिर से नए अंदाज में जिंदा कर सकती हैं। इस दिन अपने दोस्तों के साथ एक डीजे पार्टी का आयोजन करें तथा रंगों में भीगे हुए होली के मस्तीभरे
नए-पुराने गीतों पर डांस करें। यकीन मानें
दिलों में तो याद रहेगी ऐसी होली, परंतु इस की वीडियो
और फोटो भी आप को गुदगुदाएंगे।
हास्य गोष्ठी
याद करें कि पहले इस दिन पर अनेक नामी लोगों तक को भी महामूर्ख टाइटल से नवाजा जाता रहा है, तो इस बार आप भी एक हास्य गोष्ठी का आयोजन कर ही डालें तथा हंसी-मजाक का भरपूर लुत्फ उठाएं। जरूरी नहीं कि हर कोई कवि ही हो, सो कोई भी हास्य कविता, शायरी, व्यंगय या फिर चुटकला सुना कर ठहाकों में डूब
जाएं। जो सबसे ज्यादा एंटरटेन करे उसे आप महामूर्ख के टाइटल से भी नवाज सकती हैं तथा ऐसे ही किसी फनी से गिफ्ट से उन्हें सम्मानित कर दें
।
चढ़े भांग का रंग
रंग ही नहीं भांग का भी उतना ही महत्व होता है इस त्यौहार में, होली के मौके पर बनने वाली ठंडाई और भांग की जगह अब अंग्रेजी शराब ने ली है,
परंतु आप इस नई ब्यार का हिस्सा बनने की अपेक्षा
पुरानी परंपरा को फिर से आरंभ कर सकती हैं, इस
बात का ध्यान रखें कि इस का जरूरत से ज्यादा सेवन करना वास्तव
में रंग में भंग डालने वाली बात हो जाएगी।
अंताक्षरी की लय
होली पर अंताक्षरी खेलने का अपना ही मजा है, सो होली खेलने के बाद
जमा लें अंताक्षरी की महफिल। होली के गीतों से लेकर प्यार और
दोस्ती तक के गीतों को इसमें शामिल करें।
पकवान की महफ़िल
मस्ती और धमाल खाने-पीने के बिना तो अधूरे हैं, सो लंच, डिनर या
टी- पार्टी जो भी रखें, उसमें होली के पकवान जैसे
गुझिया, मालपुए, खीर, समोसे एवं दही-भल्ले इत्यादि शामिल करें।
टोली मस्तानों
पहले होली के दिन अलग-अलग टोलियां घर-घर जाकर दोस्तों को रंग और गुलाल लगाती थीं। आप भी कुछ दोस्तों की टोली
बना कर घर से निकल जाइये उन लोगों से मिल कर त्यौहार
मनाने को, जो आप तक नहीं आ सके, सो उन्हें रंग लगा कर होली के रंग में रंग डालें।
दुश्मन भी गले लग जाते हैं
होली के दिन तो दुश्मन भी दुश्मनी भूल कर गले लग जाते हैं, सो इस
छोटी सी जिंदगी में दुश्मनी निभाने का समय कहां, ऐसे में उन दोस्तों और रिश्तेदारों को मनाने का बेहतरीन मौका है, जिन से बोल-चाल बंद हुए अरसा
हो गया है। यही उचित समय है कि उन्हें भी रंग लगाने पहुंच जाएं, फिर देखिए सारे गिले-शिकवों पर रंग और गुलाल दोस्ती एवं प्यार का रंग कैसे चढ़ता हैं।
हेमा शर्मा

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