मां करती शेर सवारी...


मां दुर्गा के नवरात्रि आरंभ हो रहे हैं और मां अपने दिव्य रूप के साथ हर किसी को दर्शन भी देती है। मां की तस्वीर या मूॢत को ध्यान से देखें तो वह स्वयं में अनेक ऐसे प्रतीकों को संजोए हुए हैं , जो भक्ति एवं ममता के साथ - साथ जीवन की अनेक समस्याओं का सामना करने की भी हमें प्रेरणा देते हैं।
मां दुर्गा के हाथों में चक्र , तलवार , धनुष और बाण ही नहीं शंख , कमल और ओम भी होता है। ममतामयी रूप के प्रतीकों के साथ हथियारों को भी अपने संग रखने वाली मां दुर्गा अपने वस्त्रों के रंग अपनी सवारी से संसार को कई संदेश देती हैं। वह जहां अपने हथियार पकड़े हाथों से दुष्टों का संहार कर अपने भक्तों की रक्षा करती है , वहीं अपने भक्तों पर प्रेम और स्नेह की वर्षा करते हुए उन्हें भय मुक्त भी करती है। वह संसार को भक्ति और कर्म का मार्ग दिखाते हुए हर रूप में एक मां के रूप में उनका मार्ग दर्शन करती नजर आती हैं।

सुदर्शन चक्र से सृष्टि रहे भय मुक्त
मां दुर्गा की तर्जनी उंगली में घूमता हुआ सुदर्शन चक्र इस बात का प्रतीक है कि पूरी सृष्टि उनके अधीन है। यह चक्र बुराई और पापों का नाश करते हुए धर्म का विकास करता है , ताकि धर्म के लिए उचित वातावरण तैयार हो सके तथा लोग निङ्क्षश्चत हो कर रह सकें।


तलवार है ज्ञान का प्रतीक
मां दुर्गा के एक हाथ में सुशोभित हाने वाली तलवार की तेज धार , चमक और उसकी आभा ज्ञान का प्रतीक मानी जाती है , जो हर तरह के संदेह से मुक्त है। उनकी तलवार की चमक यह भी बताती है कि ज्ञान के मार्ग की राह भले ही कठिन हो परंतु उस पर चलते हुए मन में कोई संदेह नहीं उपजता है।


ओम में समाई शक्तियां
मां दुर्गा के हाथ में सुशोभित ऊँ परमात्मा के होने का ज्ञान देता है। ऊँ में ही समस्त शक्तियां समाई हुई हैं , सो परमात्मा को पाने के लिए ओम का ध्यान करना बेहद आवश्यक है।


तेजमयी है लाल रंग
मां दुर्गा को लाल रंग विशेष रूप से प्रिय है , उनके परिधान और उनका श्रृंगार ही नहीं बल्कि उन्हें अॢपत किए जाने वाले फूल एवं फल भी लाल रंग के ही होते हैं। नवरात्रि के दिनों में जब कलश की स्थापना की जाती है , तो उस पर भी लाल कपड़े या चुनरी में लिपटा हुआ नारियल रखा जाता है तथा लाल रंग की मौली से ही रक्षा सूत्र बांधा जाता है।
लाल रंग ऊर्जा एवं तेज का प्रतीक है , जब इसे किसी भी पूजा या अनुष्ठान में शामिल किया जाता है , तो इसका एक अर्थ यह भी होता है कि सूर्य देव और मंगल ग्रह की कृपा पूजा करने वाले पर बनी रहे। यही कारण है कि मां दुर्गा को अॢपत की जाने वाली अधिकांश चीजें लाल रंग की ही होती हैं।


तीर-धनुष दृढ़ता का प्रतीक
मां दुर्गा ने तीर - धनुष और वज्र भी धारण किया होता है , जो कि ऊर्जा , तीव्रता और दृढ़ता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन सब से वह यह बताने का प्रयास करती हैं कि कर्म के मार्ग पर चलो या फिर अपने कदम धर्म के मार्ग पर बढ़ाओ , परंतु उनके प्रति आप के मन में दृढ़ता होनी चाहिए। अत : स्वयं को वज्र के समान दृढ़ रखें तथा किसी भी बाधा को अपने लक्ष्य के मध्य आने दें।


त्रिशूल से पूर्ण नियंत्रण
तीन गुणों का प्रतीक माना जाता है त्रिशूल को , मां दुर्गा के हाथों में जो त्रिशूल है , वह बताता है कि संसार में तीन तरह की प्रवृत्तियां होती हैं अर्थात सत यानी सत्य , रज यानी सांसारिक और तम यानी तामसी प्रवृत्ति। त्रिशूल के तीन नुकीले सिरे इन तीनों प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन प्रवृत्तियों पर हमारा पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए , ताकि ये हम पर हावी हो सकें।


शंख में छिपी पवित्रता
मां के हाथों में शंख इसी बात का संदेश देता है कि मां के पास आने वाले सभी भक्त पूर्ण रूप से पवित्र हो जाते हैं , वास्तव में शंख ध्वनि एवं पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। शंख से निकलने वाली ध्वनि शांति और समृद्धि की सूचक है। इसी लिए कहते हैं कि मां दुर्गा की भक्ति करने से हमारे मन से हर प्रकार के बुरे विचार स्वयं ही समाप्त हो जाते हैं।


अछूता कमल का फूल
माता के हाथों में जो कमल का फूल होता है। वह बताता है कि जिस प्रकार कमल का फूल कीचड़ में रह कर भी उस से अछूता और पवित्र ही रहता है , उसी प्रकार मनुष्य को भी सांसारिक कीचड़ अर्थात वासना , लोभ एवं लालच से दूर रह कर सफलता को प्राप्त करना चाहिए। स्वयं में आध्यात्मिक गुणवत्ता को विकसित करना चाहिए। वह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य कायम रखने और कर्म करने से एक दिन सफलता अवश्य मिलती है।


शेर सवारी से शक्ति परिपूर्ण
जंगल के राजा शेर को उग्रता और ङ्क्षहसक प्रवृत्तियों का प्रतीक भी माना जाता है। मां दुर्गा जो कि हमेशा शेर की सवारी करती हैं , वह यही संदेश देती हैं कि शक्ति से परिपूर्ण वही हो सकता है जो उग्रता और ङ्क्षहसक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पाना जानता हो। अपने जीवन में हावी होने वाली हर बुराई और अधर्म पर नियंत्रण पा कर ही हम शक्ति संपन्न बन सकते हैं तथा धर्म की राह पर निॢवघ्र चल सकते हैं।

हेमा शर्मा

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog