क्या आपके जीवन में भी हैं ऐसे दोस्त - हेमा शर्मा

क्या आपके जीवन में भी हैं ऐसे दोस्त 

जिंदगी के सफर में न जाने कितने ही दोस्त मिलते और बिछुड़ते हैं, परंतु हर किसी के साथ आप जीवन का सुख-दुख नहीं बांट सकते, सुख के समय में तो आपके आस-पास दोस्तों का जमघट लगा रहता है, परंतु मुश्किल की घड़ी में जो साथ दे, वही तो सच्चा दोस्त होता है। दोस्त एक जैसी आदतों वाले भी हो सकते हैं और विपरीत आदतों वाले भी होते हैं और दोनों ही तरह के लोगों की दोस्ती की मिसाल देखते ही बनती है। शायद यही कारण है कि एक दोस्त मुसीबत में हो तो दूसरे को उसकी भनक बिना बताए ही लग जाती है।

दोस्ती की बुनियाद बचपन से

पवित्र रिश्ते का अहसास कराती दोस्ती की बुनियाद किस तरह से विश्वास, सच्चाई, निष्ठा और वफादारी पर टिकी होती है,  इसकी समझ बचपन से ही आनी शुरू हो जाती है। जब बच्चा स्कूल जाना शुरू करता है, तो पहली बार वहां दोस्त बनाता है, वहीं वह अपने दोस्त पर विश्वास करना तथा उससे हर बात सच्चाई से बताना भी सीख जाता है तथा दोस्त के झूठ बोलने पर रूठ भी जाता है। स्कूल में बच्चे की अपनी एक अलग दुनिया होती है, जिस में उस के दोस्त भी बहुत सारे होते हैं, उन के साथ खेलते-कूदते तथा टिफन एवं टॉयज शेयर करते बड़ा होता है, परंतु बड़े होते-होते सबकी राह अलग हो जाती है, विरले ही होते हैं वे लोग जिनकी दोस्ती छुटपन से चल कर आखिर तक कायम रहती है।
कुछ कॉलेज तक साथ रहते हैं, तो कुछ प्रोफेशनल लाईफ में मिलते हैं। बेस्ट फ्रैंड के लिए भी हम इस बात से अनजान रहते हैं कि कौन सा दोस्त साथ देगा और कौन बीच में साथ छोड़ जाएगा।

दिल की बातें हों सांझी

किसी से दोस्ती करने का कोई बेसिक फंडा नहीं होता, परंतु जाने-अनजाने कुछ लोगों से दिल का रिश्ता बन ही जाता है, जिन से दिल की बात कहना और हर लम्हा बांटना अच्छा लगता है, जहां कोई औपचारिकता नहीं होती, जिन की सलाह आप को सही राह दिखाती है, वही दोस्ती दूर तक साथ निभाती है।
युवाओं से ज्यादा एक अच्छे दोस्त की जरूरत बुजुर्गों को ज्यादा होती है, क्योंकि उम्र के इस पड़ाव पर वे अपने दिल की बातें और हर परेशानी को अपने दोस्त से ही सांझा कर सकते है, तभी तो वे पार्क और सोसायटी में ऐसे लोग ढूंढते हैं, जिन से बात कर के उन्हें तसल्ली मिल सके।

सच्चा दोस्त

सच्चा दोस्त जानने वाले लोगों की उस भीड़ से अलग होता है, जो केवल मस्ती और मजाक के लिए मिलते हैं, जो खुशियों में शामिल होते हैं, परंतु दुख के समय वे रात की छाया के समान गायब हो जाते हैं।
सच्चा दोस्त वह होता है, जो आप के गलत होने पर आपको सही राह दिखा सके तथा उसे इस बात की परवाह न हो कि ऐसा करने से उसके रिश्ते पर भी असर पड़ सकता है।
कई बार तो मां-बाप भी अपनी बात समझाने के लिए बच्चों के दोस्तों का सहारा लेते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि भले ही दुनिया अपने खिलाफ लगती हो, परंतु दोस्त की बात और सलाह को हर कोई गंभीरता से लेता है।
बंधन न माने
दोस्ती का रिश्ता हम अपने जीवन में खुद चुनते हैं तथा इसके लिए जाति, धर्म, अमीरी-गरीबी और उम्र के फांसले के  बंधन को बिलकुल नहीं मानते।यहां तक कि एक लडक़ा और लडक़ी भी ता-उम्र अच्छे दोस्त बने रह सकते हैं।

दोस्तों की गिनती

आज सोशल साइट्स ने फ्रेंडशिप के मतलब को बदल कर रख दिया है, युवाओं की फ्रेंड लिस्ट में कितने ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें वे जानते भी नहीं, परंतु गिनती बढ़ाने की ललक में वे उन्हें अपने साथ जोड़ते हुए दोस्ती का दर्जा दे देते हैं। यह बात तो युवा भी जानते हैं कि अपनी इस फ्रेंड लिस्ट के साथ वे केवल जोक्स, फोटो, गीत या ऐसी ही बातें सांझी कर सकते हैं लेकिन इनके साथ अपने गम या दिल की भावनाएं नहीं सांझी कर सकते क्योंकि उस पर लाइक्स तो बहुत आ जाएंगे, क्योंकि आपके मन के ज्वार भाटे को वे लोग समझ ही नहीं सकते।

समझदारी से चुनें दोस्त

दोस्तों की संगत में ही इंसान ज्यादा रहता है, इसी लिए तो कहा जाता है कि दोस्त भी समझदारी से चुनने चाहिए, क्योंकि अच्छे दोस्तों की संगत जहां चंदन के समान होती है और उनके साथ से ही आप में बहुत से अच्छे गुण स्वत: ही आ जाते हैं, वहीं गलत संगत वाले दोस्त हमेशा गलत काम करने की ही सलाह देते हैं, सो ऐसे दोस्तों से दूरी बनाए रखना ही सही होता है। यदि कोई दोस्त गलत राह पर चल पड़ा है, तो यह सोच कर चुप्पी साध कर न बैठ जाएं कि इससे आपकी दोस्ती टूट जाएगी, बल्कि उसे सही राह पर लाने का प्रयास करें तथा उसके परिवार को भी बताएं, ताकि उसे समय रहते सुधारा जा सके।
हेमा शर्मा


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