Mother's Day hindi poem

बदल रहा है वक्त

 वक्त धीरे-धीरे बदल रहा है
सोच का नजरिया भी अब
रफ्ता- रफ्ता बदल रहा है
अब---
पहले बेटी के पैदा होने पर
उसके दुल्हन बन विदा होने के
ख्वाब देख रोया करती थी मां
अब---
बढ़ती हुई बेटी को देख कर
कलैक्टर से डॉक्टर बनाने के
ढेरों सपने बुनती है एक मां
अब---
बेटी को संस्कारों के साथ-साथ
निडर बनने की भी शिक्षा देती है
दुनिया में जीने का ढंग बताती है मां
अब---
उसे पहले कदम के साथ ही
गिरने पर संभलना सिखाती है
मजबूती से कदम जमाना सिखाती है मां
अब---
छोटी उम्र में ही सही-गलत की
पहचान करना बेटी को सिखाती है
हर पहलू से खुद ही रूबरू कराती है मां
अब---
जानती है कि अजनबी संग
बेटी को अकेले नहीं छोडऩा
थोड़ा अविश्वास करना भी सिखाती है मां
अब---
बेटी के भविष्य और सुरक्षा की
सोच ही हरदम हावी रहती है
आंखों में ख्वाब नए पालती है मां।

हेमा शर्मा

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