हर बात पर रोकती और टोकती है मां
हर बात पर रोकना और टोकना मानो मां की आदत बन गई है, जो भी करना चाहो या खाना चाहो तो मां पहले ही उसे रोक देती है... और बहुत सी बातों पर तो मनाने पर भी नहीं मानती, मानों सीने में दिल नहीं पत्थर हो। देखा जाए तो अपनी इसी रोक-टोक से मां बच्चे की जिंदगी को बदल कर उसे आगे बढऩे की राह दिखाती है। जो कुछ भी हम अपनी जिंदगी में बनते हैं, वह मां के मार्गदर्शन से ही संभव हो पाता है।आप बच्चों को अक्सर यह कहते हुए सुन सकते हैं कि यूं तो मां बहुत अच्छी होती है, पर हर बात की जिद वह खुद करती है और जिद्दी हमें कहती है, जानती भी है कि हमें उस पर इतना भरोसा होता है कि उसकी बातों पर आंख बंद कर विश्वास कर लें, फिर भी अपनी बात मनवाने को कई तरह के डर दिखाती है।
धूप में मत निकलो
गर्मी में स्कूल से आ कर बच्चा बाहर चिलचिलाती धूप में खेलने की जिद करे, तो कौन मां होगी, जो बच्चे को इसकी इजाजत देगी, तिस पर कहेगी कि बाबा पकड़ कर ले जाएगा। मौसम की पहली बारिश में नहाने को भी मां कभी नहीं कहती, क्योंकि वह नहीं चाहती कि उसका बच्चा बीमार होकर दवाएं खाता रहे। रात को देर तक टीवी देखने पर मां ना केवल सोने को कहती है, बल्कि भूत आने की भी धमकी देती है।संस्कार सिखाती
मां बच्चे को बड़ों के संग अभद्र व्यवहार करने से हमेशा रोकती है, वह नहीं चाहती कि उसका बच्चा आगे चल कर निर्दयी, आलसी और बदतमीज बने, इस लिए मां बच्चों को बचपन से ही प्रेम का पाठ पढ़ाती है, कभी ईश्वर के मंत्र सुना कर, तो कभी संस्कार की बातें सुना कर तो कभी महान लोगों की कहानियां सुना कर, ताकि संस्कार से परिपूर्ण उसके बच्चे के व्यक्तित्व पर कभी कोई प्रश्न चिन्ह न लगे। बच्चे जो देखते हैं वह सीखते हैं, सो वह अपना व्यवहार ऐसा बना लेती है, ताकि बच्चे बड़ों का आदर करें।चैटिंग और जंक फूड से दूर
वीडियो चैटिंग एवं फेसबुक के बेजा इस्तेमाल से मां हमेशा खीझती है, क्योंकि इस आदत ने बच्चों को एकाकी और कमरों में बंद रहने वाला बना दिया है, वह चाहती है कि उसका बच्चा दोस्तों से रूबरू मिले, ताकि उनकी दोस्ती गहरी हो।यही नहीं यूं तो मां पूछती रहेगी कि क्या खाना है और यदि बर्गर, पिज्जा और नूडल्स आदि खाने की बात करो तो तुरंत जंक फूड कह कर मना कर देगी, क्योंकि उसकी यही ख्वाहिश रहती है कि वह अपने बच्चे को जंक फूडस से दूर रख कर उसे पौष्टिक खाना ही खिलाए।
प्रेरणा बनती
पढ़ाई के समय खेलने का भले ही कितना ही मन क्यों न हो, परंतु मां कभी इसकी इजाजत नहीं देती, बल्कि वह बच्चों को समय पर स्कूल का काम करने और पढऩे के लिये प्रेरित करती है। यदि बच्चा पढऩे में आना-कानी करे तो उसे डांटती भी है। एक मां ही तो अपने बच्चे को अच्छी आदतों और पढ़ाई का महत्व बताते हुए बेहतर इंसान बनने को प्रेरित करती है।जीत के लिए तैयार करती
एक मां जानती है कि यदि वह जान-बूझ कर बच्चे से हार गई, तो उसका बच्चा जीवन की रेस में कभी नहीं जीत पाएगा, सो वह अपने बच्चे को जीवन के हर मोड़ पर मुश्किलों का सामना करना सिखाते हुए जीत के लिए तैयार करती है।दिशा दिखाती है
बच्चा भले ही कितना ही बड़ा क्यों न हो जाए, मां उसे वक्त पर खाना खाने और वक्त पर घर आने के लिए कहती हैं। मां कितनी ही आधुनिक क्यों ना हो जाए, परंतु कभी अपने बच्चे से तेज गाड़ी चलाने, क्लब और बार जाने या नशा कर बहकने को नहीं कहती। हर मां की यही ख्वाहिश रहती है कि उसका बच्चा सफलता एवं लोकप्रियता के उस मुकाम तक पहुंचे कि उसका सिर भी फख्र से ऊंचा हो उठे। यही कारण है कि मां गलत बातों और आदतों के लिए बचपन से ही रोकती है।हेमा शर्मा



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