रिश्तों में क्यों हो उलझन

 जीवन में अक्सर किसी किसी जरूरत को पूरा करने के लिए ही रिश्ते बनाए जाते हैं और जब वह जरूरत या अपेक्षा पूरी नहीं होती, तो रिश्तों में उलझनें एवं दरारें जाती हैं। किसी से मन-मुटाव होने पर उसके बारे में कोई भी फैसला लेते समय उससे जुड़ी अपनी अच्छी यादों के बारे में भी अवश्य सोच कर देखें कि क्या आप वास्तव में उन्हें भुला सकती हैं 






           अपने से पूछे 

यदि आप सोचती हैं कि दूसरे गलत हैं, तो खुद से पूछें कि कहीं कुछ ऐसा तो नहीं, जो आपको भीतर से उदास कर रहा है। कई बार समस्या का समाधान खुद के भीतर ही होता है। जीवन की बड़ी तस्वीर देखें तथा रिश्तों को कुछ अपेक्षाओं तक ही सीमित करें। दूसरों की भी सुनें।

खुद में बदलाव

 यदि किसी को बदलना चाहती हैं, तो खुद से पूछें कि आप खुद में क्या बदल सकती हैं। यदि आप को लगता है कि आप जीवन से खुश नहीं हैं, तो इसका दोष संबंधों को दें, बल्कि ऐसे काम करें, जो आप को यह अहसास कराएं कि इस दुनिया में आपकी भी जगह है।

कहीं आप भी तो ऐसी नहीं

 एक पल के लिए अपने जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचें, जो आपको टैंशन देता है। अब उसके बारे में वह तीन बातें सोचें जो आपको पसंद नहीं है, फिर खुद के भीतर झांकें और पूछें कि आप का उनके साथ व्यवहार कैसा था, कहीं आप भी तो वैसी ही नहीं हैं। क्या आप खुद को बदल सकती हैं, जब आप अपनी सोच और व्यवहार में से उन आदतों और तरीकों को दूर कर देंगी तो वह व्यक्ति भी बदल जाएगा या फिर आपके जीवन से चला जाएगा। यह बात बॉस, सहकर्मी, कर्मचारी, दोस्त, प्रेमी, पति और बच्चे सब पर लागू होती है।

बॉस
 यदि आप सोचती हैं कि आपके बॉस सिर्फ  गलतियां ही निकालते हैं और कभी आपकी प्रशंसा नहीं करते, तो एक बार खुद के भीतर देखें। कहीं आप ही तो यह नहीं मान बैठी हैं कि बॉस गलती ही निकालते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको ही उनका हर फैसला गलत लगता है। यदि ऐसा है तो अपना नजरिया बदल कर उनके शब्दों का वास्तविक मर्म समझना आरंभ करें।

सहकर्मी
आपको ऐसा क्यों लगता है कि कोई सहकर्मी आपका बुरा चाहता है या आपको सहयोग नहीं देता, जरा गौर कर के देखें कहीं ऐसा तो नहीं कि आप खुद भी दूसरों को सहयोग नहीं करती हैं, इसलिए दूसरे आप को सहयोग करने से कतराते हैं।

दोस्त

 क्या आपकी कोई सहेली आपको हीनता का अहसास कराती है या आपका इस्तेमाल करती है। यदि ऐसा है तो उसका कारण जानने का प्रयास करें। कहीं ऐसा तो नहीं कि जिन क्षेत्रों में आप सक्षम हैं, वहां आप अनजाने में उसे हीनता का अहसास करा रही हों।


पार्टनर
 यदि आप को लगता है कि आप का पार्टनर चिड़चिड़ा एवं असहयोगी है या वह आपकी नहीं सुनता तो तुरंत किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले उसके अतीत में जाएं। कहीं ऐसा तो नहीं कि उसने अपने आसपास या बचपन में ऐसे जोड़े देखे हैं, जो एक-दूसरे का सहयोग नहीं करते तथा रिश्तों की वह छवि उसके मन में घर कर गई हो।

                        हेमा शर्मा

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